स्नातकोत्तर महाविद्यालय पट्टी, प्रतापगढ़ की स्थापना प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, जनपद के महामना के रूप में ख्याति प्राप्त एवं प्रसिद्ध विधिवेत्ता स्व० पं० मुनीश्वरदत्त उपाध्याय के कर कमलों द्वारा 16 जुलाई 1971 को “डिग्री कॉलेज पट्टी” के नाम से की गई थी। जिसका उद्घाटन तत्कालीन कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश के राज्यपाल डॉ० वी० गोपाल रेड्डी द्वारा किया गया था। प्रारम्भ में हिन्दी, संस्कृत, प्राचीन इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र और शिक्षा शास्त्र विषयों के साथ पठन-पाठन की मान्यता मिली। उस समय “डिग्री कॉलेज पट्टी” गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर से सम्बद्ध था। 1975 से अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद की स्थापना के साथ महाविद्यालय की सम्बद्धता अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद से हो गई। कालान्तर में, सत्र 1991-92 में स्नातक स्तर पर भूगोल एवं अर्थशास्त्र की मान्यता उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मिली। साथ ही, सत्र 1992-93 में परास्नातक स्तर पर शिक्षा शास्त्र विषय की मान्यता शासन से मिलने पर “डिग्री कॉलेज पट्टी” का नाम स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पट्टी, प्रतापगढ़ हो गया। पुनः इसी क्रम में सन् 1993-94 में प्राचीन इतिहास तथा 1995-96 में समाजशास्त्र एवं राजनीति शास्त्र की मान्यता परास्नातक स्तर पर शासन द्वारा प्राप्त हुई।
21वीं सदी में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा में नई संभावनाओं और उसकी चुनौतियों का समाधान करने हेतु, साथ ही विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस महाविद्यालय की प्रबंध समिति, प्राचार्य एवं शिक्षकों के अथक परिश्रम और प्रयासों से महाविद्यालय में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की समय-समय पर मान्यता ली गई। इस क्रम में सत्र 2004-05 से शिक्षक-प्रशिक्षण कार्यक्रम (बी.एड.) प्रारम्भ हुआ, वर्ष 2019 में स्नातक स्तर पर विज्ञान विषयों की सम्बद्धता, वर्ष 2020 में स्नातकोत्तर स्तर पर हिन्दी एवं भूगोल विषय की सम्बद्धता तथा स्नातक स्तर पर गृहविज्ञान और अंग्रेजी विषय की भी सम्बद्धता प्राप्त हुई। वर्ष 2024 में स्नातक स्तर पर शारीरिक शिक्षा तथा स्नातकोत्तर स्तर पर गृहविज्ञान की सम्बद्धता भी नवस्थापित प्रो० राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय, प्रयागराज से प्राप्त हुई।
इस महाविद्यालय में विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए पुस्तकालय में पर्याप्त एवं उच्च गुणवत्ता वाली पुस्तकें उपलब्ध हैं। वर्तमान समय में महाविद्यालय प्रशासन उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता और अनुशासन बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत है। “राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020” की संकल्पनाओं के साथ-साथ कला, विज्ञान एवं मानविकी विषयों की दृष्टि से आज यह महाविद्यालय जनपद के एक प्रमुख शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित है, जहाँ का उत्तम शैक्षिक वातावरण एवं अनुशासन विद्यार्थियों के लिए वरदान है।
भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान-अनुसंधान के समन्वय से उत्कृष्ट मानव संसाधन का निर्माण करना जो राष्ट्र और समाज के सतत विकास में अग्रणी भूमिका निभाएँ।
विद्यार्थियों को समावेशी और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के माध्यम से अनुसंधान, चिंतन और नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना।
साथ ही संवेदनशील होने के साथ-साथ उनमें रोजगारपरक कौशल और नेतृत्व क्षमता का विकास करना।
1- शैक्षिक विकास
2- शोध एवं प्रकाशन
3- अधोसंरचना विकास (Infrastructural Development)
4- छात्र विकास (Student Development)
5- डिजिटल परिवर्तन
6- सामुदायिक सहभागिता
| क्षेत्र | 2025-26 | 2026-27 | 2027-28 | 2028-29 | 2029-30 |
|---|---|---|---|---|---|
| स्मार्ट क्लास | 02 कक्ष | 03 कक्ष | 05 कक्ष | 07 कक्ष | 10 कक्ष |
| शोध गतिविधि | सेमिनार | रिसर्च प्रोजेक्ट | शोध प्रकाशन में वृद्धि | रिसर्च सेंटर | सेंटर ऑफ एक्सीलेंस |
| पुस्तकालय | डिजिटलीकरण | ई-जर्नल | ई-लाइब्रेरी | विस्तार | पूर्ण |
| कौशल पाठ्यक्रम | 02 कोर्स | 03 कोर्स | 04 कोर्स | 05 कोर्स | स्थायी |