स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पट्टी, प्रतापगढ़ (उ.प्र.)

वर्ष 2025 से 2030 के लिए संस्थागत विकास योजना (Institutional Development Plan – IDP)

1- संस्थान का परिचय

स्नातकोत्तर महाविद्यालय पट्टी, प्रतापगढ़ की स्थापना प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, जनपद के महामना के रूप में ख्याति प्राप्त एवं प्रसिद्ध विधिवेत्ता स्व० पं० मुनीश्वरदत्त उपाध्याय के कर कमलों द्वारा 16 जुलाई 1971 को “डिग्री कॉलेज पट्टी” के नाम से की गई थी। जिसका उद्घाटन तत्कालीन कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश के राज्यपाल डॉ० वी० गोपाल रेड्डी द्वारा किया गया था। प्रारम्भ में हिन्दी, संस्कृत, प्राचीन इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र और शिक्षा शास्त्र विषयों के साथ पठन-पाठन की मान्यता मिली। उस समय “डिग्री कॉलेज पट्टी” गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर से सम्बद्ध था। 1975 से अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद की स्थापना के साथ महाविद्यालय की सम्बद्धता अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद से हो गई। कालान्तर में, सत्र 1991-92 में स्नातक स्तर पर भूगोल एवं अर्थशास्त्र की मान्यता उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मिली। साथ ही, सत्र 1992-93 में परास्नातक स्तर पर शिक्षा शास्त्र विषय की मान्यता शासन से मिलने पर “डिग्री कॉलेज पट्टी” का नाम स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पट्टी, प्रतापगढ़ हो गया। पुनः इसी क्रम में सन् 1993-94 में प्राचीन इतिहास तथा 1995-96 में समाजशास्त्र एवं राजनीति शास्त्र की मान्यता परास्नातक स्तर पर शासन द्वारा प्राप्त हुई।

21वीं सदी में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा में नई संभावनाओं और उसकी चुनौतियों का समाधान करने हेतु, साथ ही विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस महाविद्यालय की प्रबंध समिति, प्राचार्य एवं शिक्षकों के अथक परिश्रम और प्रयासों से महाविद्यालय में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की समय-समय पर मान्यता ली गई। इस क्रम में सत्र 2004-05 से शिक्षक-प्रशिक्षण कार्यक्रम (बी.एड.) प्रारम्भ हुआ, वर्ष 2019 में स्नातक स्तर पर विज्ञान विषयों की सम्बद्धता, वर्ष 2020 में स्नातकोत्तर स्तर पर हिन्दी एवं भूगोल विषय की सम्बद्धता तथा स्नातक स्तर पर गृहविज्ञान और अंग्रेजी विषय की भी सम्बद्धता प्राप्त हुई। वर्ष 2024 में स्नातक स्तर पर शारीरिक शिक्षा तथा स्नातकोत्तर स्तर पर गृहविज्ञान की सम्बद्धता भी नवस्थापित प्रो० राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय, प्रयागराज से प्राप्त हुई।

इस महाविद्यालय में विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए पुस्तकालय में पर्याप्त एवं उच्च गुणवत्ता वाली पुस्तकें उपलब्ध हैं। वर्तमान समय में महाविद्यालय प्रशासन उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता और अनुशासन बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत है। “राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020” की संकल्पनाओं के साथ-साथ कला, विज्ञान एवं मानविकी विषयों की दृष्टि से आज यह महाविद्यालय जनपद के एक प्रमुख शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित है, जहाँ का उत्तम शैक्षिक वातावरण एवं अनुशासन विद्यार्थियों के लिए वरदान है।

2- दृष्टि वाक्य (Vision):

भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान-अनुसंधान के समन्वय से उत्कृष्ट मानव संसाधन का निर्माण करना जो राष्ट्र और समाज के सतत विकास में अग्रणी भूमिका निभाएँ।

3- ध्येय वाक्य (Mission):

विद्यार्थियों को समावेशी और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के माध्यम से अनुसंधान, चिंतन और नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना।

साथ ही संवेदनशील होने के साथ-साथ उनमें रोजगारपरक कौशल और नेतृत्व क्षमता का विकास करना।

4- मूलभूत मूल्य (Core Values):
  • * ज्ञान
  • * नैतिकता
  • * उत्कृष्टता
  • * समावेशिता
  • * नवाचार
  • * सामाजिक उत्तरदायित्व
  • * संवेदनशीलता
5- वर्तमान स्थिति का विश्लेषण (SWOT Analysis):
➤ Strengths (ताकत)
  • * 50 वर्ष से अधिक की शैक्षिक परंपरा
  • * लगभग 3500 से अधिक विद्यार्थियों का बड़ा शैक्षिक समुदाय
  • * स्नातक एवं परास्नातक दोनों स्तरों पर अध्ययन
  • * B.Ed. पाठ्यक्रम का संचालन
  • * उन्नत एवं सुसज्जित प्रयोगशालाओं की उपलब्धता
  • * ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा का प्रमुख केंद्र
  • * U.P.R.T.O.U. के माध्यम से भी शिक्षा ग्रहण करने की सुविधा
  • * N.C.C., N.S.S., रोवर्स-रेंजर्स इकाइयों की सक्रिय गतिविधियाँ
➤ Weaknesses (कमियाँ)
  • * सीमित शोध गतिविधियाँ
  • * डिजिटल सुविधाओं की कमी
  • * उद्योग एवं संस्थानों से सीमित सहयोग
➤ Opportunities (अवसर)
  • * राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत नए पाठ्यक्रम
  • * कौशल आधारित कार्यक्रम
  • * ऑनलाइन एवं दूरस्थ शिक्षा तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म
➤ Threats (चुनौतियाँ)
  • * निजी संस्थानों से प्रतिस्पर्धा
  • * सीमित वित्तीय संसाधन
  • * ग्रामीण विद्यार्थियों में डिजिटल अंतर (Gap)
6- 2025–2030 के लिए प्रमुख लक्ष्य

1- शैक्षिक विकास

  • * आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (A.I.) आधारित पाठ्यक्रमों और डिजिटल सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करना
  • * नए Certificate / Skill Courses प्रारम्भ करना
  • * अंतर्विषयी (Interdisciplinary) अध्ययन को बढ़ावा देना

2- शोध एवं प्रकाशन

  • * शिक्षकों को Research Projects के लिए प्रोत्साहित करना
  • * प्रतिवर्ष राष्ट्रीय संगोष्ठी / सेमिनार आयोजित करना
  • * शोध पत्र प्रकाशन और पुस्तक लेखन को बढ़ाना

3- अधोसंरचना विकास (Infrastructural Development)

  • * स्मार्ट क्लासरूम की संख्या में वृद्धि करना
  • * प्रयोगशालाओं को अत्याधुनिक बनाना
  • * पुस्तकालय का डिजिटलीकरण
  • * ई-लाइब्रेरी की स्थापना

4- छात्र विकास (Student Development)

  • * Career Counseling Cell स्थापित करना
  • * Skill Development Programs में गुणात्मक एवं मात्रात्मक वृद्धि करना
  • * प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन

5- डिजिटल परिवर्तन

  • * Learning Management System (LMS) लागू करना
  • * ई-कंटेंट और ऑनलाइन कक्षाओं की सुविधा बढ़ाना
  • * प्रशासनिक कार्यों का डिजिटलीकरण

6- सामुदायिक सहभागिता

  • * आस-पास के गाँवों में साक्षरता एवं सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम
  • * पर्यावरण संरक्षण अभियान
  • * महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम
7- कार्य योजना (Action Plan)
क्षेत्र 2025-26 2026-27 2027-28 2028-29 2029-30
स्मार्ट क्लास 02 कक्ष 03 कक्ष 05 कक्ष 07 कक्ष 10 कक्ष
शोध गतिविधि सेमिनार रिसर्च प्रोजेक्ट शोध प्रकाशन में वृद्धि रिसर्च सेंटर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
पुस्तकालय डिजिटलीकरण ई-जर्नल ई-लाइब्रेरी विस्तार पूर्ण
कौशल पाठ्यक्रम 02 कोर्स 03 कोर्स 04 कोर्स 05 कोर्स स्थायी
8- वित्तीय संसाधन
  • * राज्य सरकार से अनुदान के लिए प्रयास
  • * UGC योजनाओं के लिए प्रयास
  • * CSR फंड के लिए प्रयास
  • * पूर्व छात्र (Alumni) से सहयोग का प्रयास
  • * स्वयं के संसाधनों को बढ़ाना
9- मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन
  • * IQAC द्वारा वार्षिक समीक्षा
  • * प्रत्येक वर्ष प्रगति रिपोर्ट
  • * शैक्षणिक परिषद द्वारा मूल्यांकन
10- अपेक्षित परिणाम (Expected Outcomes)
  • * शैक्षणिक गुणवत्ता में वृद्धि
  • * शोध एवं अकादमिक गतिविधियों में सुधार
  • * विद्यार्थियों की कुशलता एवं रोजगार क्षमता में वृद्धि
  • * NAAC मूल्यांकन में बेहतर ग्रेड